Vaadiyon Mai..!!

वादियों मे हुस्न यूँ न घोलो तुम,

के किसी ने कलियों पे सवेरा कम बिखेरा  है।

चांदनी सी शीतल, पर सूरज को जलाती,

उफ्फ !! ये खूबसूरती तुम्हारी…

भोर भये मेरे खयालो को घेरा है  !! -पथिक

 

 

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Ae Zindagi !

के काश हकीकत कुछ जुदा होती हकीकत से…. बहती ज़िन्दगी के हम दो किनारे न होते।

ऐ ज़िन्दगी बाँहों में भरले मुझे… के काश जीने के लिए नज़रों के ही बस सहारे न होते।

 

आसमानो में चलता, भोर भये उगते सूरज सा खिलता,

हकीकत को दोनों बाँहें खोलकर मिलता… न मैं होता, न तुम होते बस हम होते…

के काश हकीकत कुछ जुदा होती हकीकत से…. बहती ज़िन्दगी के हम दो किनारे न होते।

 

कब तक अंधेरों में जीया जाये ? घने बादलों से कभी झांक तो ऐ ज़िन्दगी…

हम यूँ ही पीछे हट जाएँ  कैसे मुमकिन है ? दांव पर लगाना क्या है बता ऐ ज़िन्दगी…

गर सोचते इतना तो क्या जमीन पर होते ?…आती जाती हवाओं के ही बस सहारे न होते।

के काश हकीकत कुछ जुदा होती हकीकत से…. बहती ज़िन्दगी के हम दो किनारे न होते।। -पथिक

 

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WO!

वो इस कदर रूबरू होती थी मेरे अहसासों से,

मेरे अहसास आज भी महकतें  है।

तपती ज़िन्दगी में तेरी जुल्फों के साये,
बाल संवारते कभी नज़र तो आये…
हम उड़ाना नही जानते पर…
कटी पतंगों के पीछे तेरी गलियों में दौड़ते थे।। – पथिक
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Aaj Bhi

आज भी चुप हूँ मैं , आज भी समझने के कोशिश कर रहा हूँ।

आज भी उन्हीं सवालों से घिरा हूँ , आज भी जवाब पाने की कोशिश कर रहा हूँ।

आज भी तुम्हे याद करता हूँ , आज भी तुम्हे भूलाने की कोशिश कर रहा हूँ।

आज भी खत लिखता हूँ तुम्हें , आज भी जवाब आने की उम्मीद कर रहा हूँ।

कबसे रुकी है ज़िन्दगी , आज भी आगे बढ़ने की कोशिश कर रहा हूँ।

आज भी अकेला चल रहा हूँ राहों में , आज भी हमसफ़र को पाने की दुआ कर रहा हूँ ।। -पथिक

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