Aarjoo…

खाक में मिल जाऊं कैसे, एक ख्वाहिश… एक नयी आरजू जगी है…

कोई बीज बोता नहीं इनके… किसी कोने में दिल के रोज़ नयी आरजू उग आती है…

थका मैं भी नहीं बरसते बरसते… पर जड़े इनकी अभी भी प्यासी है…

बरसना होगा हदों तक… बरसना होगा लहू सूखने तक…

शोले भड़कते है इनकी छाँव में… के ज़िन्दगी अभी आरजुओं में बाकी है..

के ज़िन्दगी अभी आरजुओं में बाकी है..। -पथिक

 

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