Naavik

पतवार टूट जाये तो नाविक क्या करे.. ?

नाव के साथ रहे..लहरों के भरोसे..?

या समुन्दर में कूद जाये…हौसले के भरोसे..?

 

शायद क्षितिज पर किनारा होता.. तो तैरकर जाना आसान लगता.. ।

अब जब हर दिशा जल मग्न है… तो नाविक क्या करे ?

अगर क्षितिज पर मेघ गरजते… तो नाव में ही रहता…।

अब जब आसमान साफ़ है तो…नाविक क्या करे… ?

 

ये ज़िन्दगी बस यही लगती है… ।

समुन्दर की तरह…अथाह अनन्त…।

कभी मौत सी शांत… कभी तूफानों सी जीवंत… ।

और हम नाविक एक नाव पर… हर पल एक दुविधा में… ।

नाविक क्या करे… ??  -पथिक

 

Image courtesy: https://s3.amazonaws.com/s3.frank.itlab.us/photo-essays/small/oct_02_0702_boat.jpg

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