Safar

शाम को देखकर महसूस होगा…खेलकर घर जाती लड़की सा इतराती है |

सूरज की मैली किरणों में तरवतर…एक शाम रास्ते पर निकल तो सही |

अलमारी में घुटती ज़िन्दगी…रास्तों पर ज़िंदादिली रहती है |

ज़िन्दगी को लिए संग अपने…किसी सफर पर निकल तो सही |

कभी घर से निकल तो सही ||

 

धूल-मिट्टी ही जंचती है…अब साजो-सामान थोड़े ही है |

फीते कसकर निकल घर से…जूतों की तली कुछ घिसे तो सही |

हाथी की सवारी न सही…कच्चे रास्ते पर पैदल सफर |

धूल भी मेहका देती है बदन…चौखट से बाहर कदम दस रख तो सही |

कभी घर से निकल तो सही ||

 

बंद कमरे बैठा ये तक न पता…झरोखे से झांकती पड़ोसन क्या कहती है |

मीठे शरबत सी मेजबानी…कभी मेहमान उसका बन तो सही |

कभी घर से निकल तो सही ||   -पथिक

.Image courtesy: http://nativepakistan.com/wp-content/uploads/Beautiful-View-of-a-Village-in-Punjab-Photos-of-villages-in-Pakistan.jpg

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