Ek Sitara

कितनों को उम्मीद बँधाता है…एक मामूली टूटता सितारा |

हम तो फिर भी गर्दिश के वो तारे हैं..जिन्हे धरती अपने सीने में जगह देती है |

वो टूटते सितारे खूब सिखाते हैं..शोर नहीं करते मरते वक़्त भी |

जिन्हे दो गज जमीन  नसीब नहीं होती..वो चुपचाप गुमनाम गहराईयों में समा जाते हैं ||

 

तारों का मेला तो लगा करेगा रातों को..पर ऐसे सितारे कम ही होंगे..|

जो टूटकर गिर जाएंगे..सर के बल टकराने को |

जब ऐसे सितारे चमकने बंद हो जाएंगे..और लोग बस अपने ऊपर ही रह जायेंगे |

क्या हम में से कोई अपनी जान की बाज़ी लगाएगा…|

दूसरो को रौशनी देने के लिए..बस दूसरों  के लिए..|

क्या कोई यूँ आसमान में जल पायेगा ?? – पथिक

 

Image courtesy: http://imgc.allpostersimages.com/images/P-473-488-90/74/7458/VXRR100Z/posters/detlev-van-ravenswaay-comet-in-the-night-sky-artwork.jpg

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