Hai Eesha !

अविश्वास में विश्वास का , मित्रता में दुर्भाव का |

सिर्फ बातों में शिष्टाचार का , शासन में भ्रष्टाचार  का |

कथनी करनी में कटाव का , सर्वत्र फैले अभाव का |

यह संसार बहुत प्यारा है ||

 

जवानी में मादकता का , समाज में अराजकता का |

नित्य बढ़ता कारोबार है , पैसे की भूख है बढ़ती |

अब शांत ही समाज रक्षकों का स्वाभाव है ||

 

आँखो  में बस खून है भरा , होठों पे कैसे प्यार है ?

कछुए सी बुद्धि  की गति , हृदय में अन्धकार है |

नियती अपनी खुद लिखते , मानवता शर्मसार है |

भोगों में लिप्त है जीवन , मार्गदर्शन आश्रित है दार्शनिक |

दर्शन का अभाव है ||

 

राम की कथाएं हैं , फकीरों की दरगाहें हैं |

बस पापों की चर्चाएं हैं  , और पापी विद्यमान हैं |

समय की गति है ये ? या मनुष्य की अवगति है ये ?

धरती वीर संत मुक्त लगती , हे ईश ! तेरा  इन्तजार है !! – पथिक

 

Image courtesy: http://wanderingmist.com/wp-content/uploads/2011/08/drown-me-o-sea_oil-painting-by-ishrath-humairah_palette-knife-strokes.jpg

Advertisements

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s